बाबा रामदेव मंदिर बिठूजा का वार्षिकोत्सव 23 व 24 को,भक्ति संध्या के साथ होंगे अन्य धार्मिक अनुष्ठान,आयोजन में बड़ी संख्या में आएंगे श्रद्धालु।

बाबा रामदेव मंदिर बिठूजा का वार्षिकोत्सव 23 व 24 को,भक्ति संध्या के साथ होंगे अन्य धार्मिक अनुष्ठान,आयोजन में बड़ी संख्या में आएंगे श्रद्धालु।


बिठुजा धाम बाबा रामदेव मंदिर का वार्षिकोत्सव 23 मई और 24 मई को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। बाबा रामदेव मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष भेरूलाल डागा ने बताया कि 23 मई की सांय को बाबा रामसा पीर मंदिर पर राष्ट्रीय भजन गायक श्री श्याम भाई पालीवाल व अन्य भजनोपदेशक लोकप्रिय कलाकारों द्वारा विभिन्न भजनों की प्रस्तुतियाँ दी जायेगी। डागा ने बताया कि यह बाबा की कृपा के साथ अद्भुत संयोग ही हैं कि 23 वीं बरसी 23 मई को ही हैं जो अपने आप में ऐतिहासिक क्षण भी होगा। ट्रस्ट अध्यक्ष डागा ने बताया कि बिठूजा के छत्तीस कौम के समस्त निवासी इस आयोजन को भव्य बनाने के लिये तन-मन से अपने कृतव्य का समर्पण भाव से निर्वहन कर रहे हैं तथा गाँव वासियों द्वारा विभिन्न समितियों का गठन कर सभी की जिम्मेदारी सुनिश्चित की गयी हैं। इस अवसर पर भक्त भविकों को संत महात्माओं का सानिध्य देने के लिए आसपास के क्षेत्रों में शिकारपुरा, समदडी, पारलु, कनाना, बालोतरा, परेऊ, तिलवाड़ा, सिरली, ब्रह्मधाम, आसोतरा आदि के विभिन्न संतों को निमंत्रण दिया गया हैं। बिठूजा धाम का पौराणिक महत्व बताते हुए डागा ने बताया कि जब अजमल जी पैदल द्वारिका गए थे तब द्वारकाधीश समुद्र में भगवान विष्णु के अवतार के रूप में विराजमान थे. द्वारकाधीश के दर्शन नहीं होने पर अजमाल जी ने पुजारी जी को पूछा कि द्वारिकाधीश कहाँ हैं? तभी पुजारी जी ने अजमाल जी को बताया कि द्वारिका धीश समुद्र में विराजमान हैं। यह सुनकर अजमाल जी ने तत्काल ही समुद्र में छलाँग लगा दी। अजमाल जी के इस समर्पण भाव से प्रसन्न होकर द्वारिकाधीश ने दर्शन देकर स्वयं के अवतार लेने का आशीर्वचन दिया। विष्णु के अवतार के रूप में जब बाबा रामदेव जी द्वारिका से उंडु काश्मीर (बाड़मेर) के लिए रवाना हुए तब बाबा ने प्रथम विश्राम स्थल के लिए बिठूजा धाम में विश्राम किया। ये बाबा की ही कृपा हैं कि तब से लेकर अब तक बिठूजा की काश्मीर के नाम से अपनी पहचान कायम हैं। बाबा के मंदिर में जिसने भी मन्नत माँगी हैं उसकी मनोकामना पूर्ण हुई हैं। बाबा रामदेव मंदिर ट्रस्ट के सचिव कुम्पाराम पंवार ने बताया कि 24 मई को ब्रह्म मुहूर्त में बाबा रामसा पीर की पूजा अर्चना के बाद आरती की जायेगी। इसके पश्चात भामाशाहों की ओर से मंदिर के शिखर पर 23 फीट की ध्वजा ढोल नगाड़ों के साथ चढ़ायी जायेगी। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सुख समृद्धि की कामना हेतु विधान पंडितों के द्वारा यज्ञ हवनादि किया जायेगा। इस अवसर पर मंदिर- देवालयों में भी पूजा अर्चना के साथ प्रतिमाओं को नवीन वस्त्राभूषण पहनाकर गुलाब पुष्पों से श्रृंगार किया जायेगा। पंवार ने बताया कि इस दो दिवसीय महोत्सव को लेकर मंदिर की रोशनी से भव्य सजावट की जा रही हैं। ग्राम वासियों द्वारा बिठूजा, आसोतरा, किटनोद,जसोल, माजीवाला, मैली, कनाना, सराणा, पारलू, मुंगडा, मेवानगर, तिलवाड़ा,जानियाणा आदि गांवों में पीले चावल वितरण कर श्रद्धालुओं को निमंत्रण दिया जा रहा हैं। उक्त कार्य में हजारों की संख्या में महिलायें, पुरूष, बच्चे इत्यादि श्रद्धालु भाग लेंगे। पुलिस- प्रशासन भी मुस्तैदी के साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस अवसर पर संतों के सानिध्य के साथ मंत्री,स्थानीय विधायक, प्रधान,सरपंच, वार्डपंच सहित विभिन्न जन प्रतिनिध तथा गण मान्य नागरिक भाग लेंगे।

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